निरमण्ड दशनामी जूना अखाड़े में बीती रात देवराज इन्द्र और वृत्र के मध्य अग्नि के लिए संघर्ष चलता रहा। - अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़

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    Monday, December 2, 2024

    निरमण्ड दशनामी जूना अखाड़े में बीती रात देवराज इन्द्र और वृत्र के मध्य अग्नि के लिए संघर्ष चलता रहा।

     


    डी. पी. रावत।

    निरमण्ड,2 दिसम्बर।

    ज़िला कुल्लू के बाह्य सिराज क्षेत्र के निरमण्ड कस्बे में स्थित दशनामी जूना अखाड़े में प्राचीन एवम् ऐतिहासिक ज़िला स्तरीय बूढ़ी दिवाली मेला निरमण्ड के प्रथम दिन की रात्रि को परम्परागत "राच की दीआऊड़ी" का मंचन पूरी रात हुआ। जिसमें वेदों में वर्णित देव राज इन्द्र और वृत्रासुर के मध्य जल और अग्नि के लिए संघर्ष हुआ। जिसमें खथांडा,निशानी,मातला,रलू आदि गांवों के पुरुषों ने अर्ध रात्रि में देव सेना के रूप में दशनामी अखाड़े में कूच किया। जिन्हें स्थानीय बोली में "गड़िया" कहा जाता है। "गड़िया" अपने अपने घरों से निकलते हुए रास्ते में कुछ इस तरह के बोल स्थानीय बोली में बोलते हैं:- 

    "आर मातला,पार निशाणी।

    मांजी बाता का,निखुआ पाणी।।

    दीआऊड़ी खूड़े, दीआऊड़ी ए......"

    ऐसी मान्यता है कि अग्नि पर देव राज इन्द्र का तथा जल पर वृत्रासुर का अधिकार था। कश्यप ऋषि की पत्नियों में से एक असुर पत्नी दनू के गर्भ से उत्पन पुत्र वृत्रासुर अग्नि पर अपना अधिकार जमाना चाहता था। 

    जबकि परम्परा के अनुसार वृत्रासुर की सेना के पात्र निरमण्ड कस्बे के परशुराम मोहल्ले के निवासी और विष्णु मोहल्ले के पुरुष अदा करते रहे हैं। जो पूरी रात निरमण्ड कस्बे के चारों ओर मशाल जला कर परिक्रमा करते हैं तथा रात खुलने से पूर्व वे भी अखाड़े में प्रवेश करते हैं। जहां देव सेना और असुर सेना के बीच अग्नि के लिए छीना झपटी होती रही। अंत में वृत्रासुर की इस संघर्ष में हार हो जाती है और वह गुफा में घुस जाता है।


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