26 अगस्त, कुल्लू/निरमण्ड।
डी० पी० रावत: विशेष रिपोर्ट।
अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़।
🚨 नोर पंचायत में विकास कार्यों से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जिला कुल्लू प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। ग्राम पंचायत नोर के पूर्व प्रधान काहन चन्द जोशी को पंचायत निधियों के दुरुपयोग तथा कर्तव्यों के निर्वहन में अवचार का दोषी पाए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के तहत छह वर्षों के लिए पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया है। साथ ही जांच में सामने आई वसूली योग्य धनराशि की रिकवरी के लिए भी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
📌 17 आरोपों में चार सिद्ध
प्राप्त कार्यालय आदेश के अनुसार ग्राम पंचायत नोर में वर्ष 2021 से 2024 के बीच करवाए गए विभिन्न विकास कार्यों में अनियमितताओं और पंचायत निधियों के कथित दुरुपयोग को लेकर शिकायत प्रशासन को प्राप्त हुई थी। शिकायत में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच समितियां गठित कीं। प्रारंभिक जांच में कुल 17 आरोपों में से आरोप संख्या 1, 10, 16 और 17 पूर्व प्रधान काहन चन्द के विरुद्ध सिद्ध पाए गए।
इसके बाद हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 146 के तहत नियमित जांच के लिए उपमंडलाधिकारी (नागरिक), निरमण्ड को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। जांच अधिकारी द्वारा 15 मई 2026 को प्रस्तुत नियमित जांच रिपोर्ट में भी उक्त चारों आरोप सिद्ध पाए गए।
💰 पत्नी के निजी खाते में 1.85 लाख रुपये के भुगतान का मामला
जांच में सामने आए आरोप संख्या-1 में मनरेगा कार्य से संबंधित जनसूचना पट्ट/साइन बोर्ड के मामले में अनियमितता का आरोप था।
जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021-22 में जनसूचना पट्ट के लिए 1.85 लाख रुपये की अदायगी की गई। आरोप के अनुसार यह राशि पूर्व प्रधान की पत्नी सुषमा देवी के निजी बैंक खाते में जमा करवाई गई।
जांच में इस भुगतान को निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया। प्रशासनिक कार्रवाई में इस मामले को पूर्व प्रधान के विरुद्ध सिद्ध आरोपों में शामिल किया गया है।
🔎 इंटरलॉक टाइल कार्य में 56,594 रुपये का अंतर
आरोप संख्या-10 में मनरेगा के तहत करवाए गए इंटरलॉक टाइल कार्य की लागत को लेकर भी जांच हुई।
रिकॉर्ड के अनुसार इस कार्य के लिए 3 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। जांच में कार्य पर 2,82,625 रुपये खर्च दर्शाए गए, जबकि पुनर्मूल्यांकन के दौरान वास्तविक कार्य की लागत 2,26,031 रुपये पाई गई।
इस प्रकार दोनों राशियों में 56,594 रुपये का अंतर सामने आया।
जांच रिपोर्ट के अनुसार इस राशि की जिम्मेदारी पूर्व प्रधान काहन चन्द और संबंधित तकनीकी सहायक पर बराबर निर्धारित की गई। दोनों से 28,297-28,297 रुपये की वसूली योग्य राशि तय की गई है।
🏗️ अमृत सरोवर में पक्के चैम्बर के नाम पर 37,800 रुपये
आरोप संख्या-16 अमृत सरोवर से जुड़े पक्के चैम्बर के निर्माण कार्य से संबंधित है।
जांच के दौरान कार्यस्थल का निरीक्षण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार मौके पर संबंधित सामग्री/पत्थर उपलब्ध नहीं पाए गए, जबकि अभिलेखों में कार्य के लिए भुगतान दर्ज था।
जांच में 37,800 रुपये की धनराशि को वसूली योग्य माना गया। यह मामला भी उन चार आरोपों में शामिल है जिन्हें नियमित जांच में सिद्ध पाया गया।
🐄 गोशाला के लिए जीआई शीट खरीद में 1.16 लाख रुपये अधिक भुगतान
आरोप संख्या-17 में गोशाला के लिए जीआई शीट खरीद से संबंधित भुगतान की जांच की गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार संबंधित फर्म को 10 फुट की जीआई शीट के लिए 880 रुपये प्रति शीट तथा 18 प्रतिशत जीएसटी की दर से स्वीकृति थी। लेकिन जांच में स्वीकृत दर की तुलना में कुल 1,16,454 रुपये अधिक भुगतान किए जाने की बात सामने आई।
इस मामले में पूर्व प्रधान काहन चन्द और पंचायत सचिव की जिम्मेदारी तय की गई। दोनों से बराबर-बराबर 58,227-58,227 रुपये की वसूली योग्य राशि निर्धारित की गई।
⚖️ कारण बताओ नोटिस के बाद प्रशासन का फैसला
चार आरोप सिद्ध होने के बाद जिला प्रशासन द्वारा पूर्व प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। प्रशासन को 20 जून 2026 को उनका जवाब प्राप्त हुआ।
आदेश के अनुसार जवाब का परीक्षण करने के बाद उसे संतोषजनक नहीं पाया गया। नियमित जांच रिपोर्ट में आरोप सिद्ध होने और जवाब से प्रशासन संतुष्ट न होने के आधार पर उपायुक्त कुल्लू द्वारा कार्रवाई का आदेश जारी किया गया।
आदेश में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की संबंधित धाराओं के तहत पूर्व प्रधान काहन चन्द को छह वर्षों के लिए पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव लड़ने से निरर्हित किया गया है।
📋 रिकवरी के लिए बीडीओ निरमण्ड को निर्देश
प्रशासन ने केवल चुनावी अयोग्यता तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। आदेश में विकास खंड निरमण्ड के खंड विकास अधिकारी को नियमों के अनुसार संबंधित वसूली योग्य धनराशि की रिकवरी के लिए आगामी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश की प्रतियां संबंधित पंचायत राज विभाग, खंड विकास अधिकारी निरमण्ड तथा पंचायत सचिव को भी भेजी गई हैं।
🗣️ शिकायतकर्ता ने बताया—‘सत्य की जीत’
उधर शलाट गांव निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट एवं शिकायतकर्ता हीरा लाल जोशी ने अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़ से मोबाइल फोन पर बातचीत में प्रशासन की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे सत्य की जीत बताया।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की कार्रवाई से अन्य लोगों को भी सबक मिलेगा और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों तथा सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का संदेश जाएगा।
📞 पूर्व प्रधान बोले—आदेश की प्रति मिलने के बाद कानूनी सलाह लेंगे
वहीं पूर्व प्रधान काहन चन्द जोशी ने अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़ से दूरभाष पर बातचीत में कहा कि उन्हें अभी तक उपायुक्त कुल्लू के आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि आदेश की प्रति प्राप्त होने और उसका अध्ययन करने के बाद कानून विशेषज्ञों से उचित सलाह-मशविरा किया जाएगा। इसके बाद आदेश के खिलाफ अपील करने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मामले को लेकर मीडिया के समक्ष अपनी प्रतिक्रिया दी जाएगी।
🔍 आगे क्या होगा?
अब इस मामले में प्रशासन के सामने अगला महत्वपूर्ण कदम जांच में निर्धारित वसूली योग्य धनराशि की रिकवरी है। इसके लिए विकास खंड निरमण्ड के स्तर पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी है।
वहीं पूर्व प्रधान द्वारा आदेश की प्रति मिलने के बाद अपील का विकल्प अपनाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले समय में यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में भी जा सकता है।
📢 पंचायत स्तर पर जवाबदेही का संदेश
नोर पंचायत से जुड़ी यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मनरेगा और अन्य विकास योजनाओं में सरकारी धन सीधे ग्रामीण विकास से जुड़ा होता है। पंचायतों के माध्यम से सड़क, पानी, स्वच्छता, रोजगार, आवास और अन्य विकास कार्यों पर सरकारी धन खर्च किया जाता है।
ऐसे में किसी भी वित्तीय अनियमितता की शिकायत सामने आने पर निष्पक्ष जांच और दोष सिद्ध होने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई को पंचायत व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि, पूर्व प्रधान द्वारा आदेश को चुनौती देने के संभावित कदम को देखते हुए मामले के अंतिम कानूनी परिणाम को संबंधित अपीलीय/न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही देखा जाएगा।
📰 अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, नोर पंचायत मामले में जिला प्रशासन के आदेश ने पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही, सरकारी धन के उपयोग और विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
नोट: इस समाचार में लगाए गए आरोपों एवं प्रशासनिक निष्कर्षों का उल्लेख उपलब्ध कार्यालय आदेश/जांच विवरण के आधार पर किया गया है। संबंधित पूर्व प्रधान का पक्ष भी समाचार में शामिल किया गया है। मामले में आगे होने वाली अपील अथवा अन्य कानूनी प्रक्रिया के परिणाम के अनुसार स्थिति में परिवर्तन संभव है।





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